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Instructive Story in Hindi – अपना अपना स्वभाव – शिक्षाप्रद हिन्दी कहानी

एक बार एक भला आदमी नदी किनारें बैठा था| तभी उसने देखा एक बिच्छू पानी में गिर गया है| भले आदमी ने जल्दी से बिच्छू को हाथ में उठा लिया| बिच्छू ने उस भले आदमी को डंक मार दिया| बेचारे भले आदमी का हाथ काँपा और बिच्छू पानी में गिर गया| भले आदमी ने बिच्छू को डूबने से बचाने के लिए दुबारा उठा लिया| बिच्छू ने दुबारा उस भले आदमी को डंक मार दिया| भले आदमी का हाथ दुबारा काँपा और बिच्छू पानी में गिर गया|

भले आदमी ने बिच्छू को डूबने से बचाने के लिए एक बार फिर उठा लिया| वहाँ एक लड़का उस आदमी का बार-बार बिच्छू को पानी से निकालना और बार-बार बिच्छू का डंक मारना देख रहा था| उसने आदमी से कहा, “आपको यह बिच्छू बार-बार डंक मार रहा है फिर भी आप उसे डूबने से क्यों बचाना चाहते हैं?”

भले आदमी ने कहा, “बात यह है बेटा की बिच्छू का स्वभाव है डंक मारना और मेरा स्वभाव है बचाना| जब बिच्छू एक कीड़ा होते हुए भी अपना स्वभाव नहीं छोड़ता तो मैं मनुष्य होकर अपना स्वभाव क्यों छोडूँ?”

मनुष्य को कभी भी अपना अच्छा स्वभाव नहीं भूलना चाहिए|

Instructive Hindi Story – दोस्ती की परख – शिक्षाप्रद हिन्दी कहानी

एक जंगल था| गाय, घोडा, गधा और बकरी वहा चरने जाते थे| उन चारो में अच्छी दोस्ती हो गई थी| वे चरते – चरते बहुत बातें किया करते थे| पेड़ के नीचे एक खरगोश का घर था| एक दिन उसने उन चारो की दोस्ती देखी|

खरगोश पास जा कर कहने लगा – “तुम लोग मुझे भी मित्र बना लो|” उन्होंने कहा अच्छा| तब खरगोश बहुत प्रसन्न हुआ| खरगोश हर रोज उनके पास आकर बैठ जाता| उनकी बातें सुन और कहानियाँ सुनकर वह भी मन बहलाया करता था| एक दिन खरगोश उनके पास बैठा कहानियाँ सुन रहा था| अचानक शिकारी कुत्तों की आवाज सुनाई दी| खरगोश ने गाय से कहा – तुम मुझे अपनी पीठ पर बैठा लो| जब शिकारी कुत्ते आए तो उन्हें सीगों से मार कर भगा देना|

गाय ने कहा – “मेरा तो अब घर जाने का समय हो गया है| तब खरगोश घोड़े के पास गया| कहने लगा – बड़े भाई| तुम मुझे अपनी पीठ पर बिठा लो और शिकारी कुत्तो से बचाओ| तुम तो एक दुलती मारोगे तो कुत्ते भाग जायेंगे| घोड़े ने कहा – “मुझे बैठना नहीं आता| मैं तो खड़े खड़े सोता हू| मेरी पीठ पर कैसे चढोगे| मेरे पाँव भी दर्द कर रहे है| इन पर नई नाल चढी है| मैं दुलती कैसे मारूँगा? तुम कोई और उपाय करो|

तब खरगोश ने गधे के पास जाकर कहा – “मित्र गधे| तुम मुझे शिकारी कुत्तो से बचा लो| मुझे पीठ पर बिठा लो| जब कुत्ते आए तो उन्हें झाडकर उन्हें भगा देना|“ गधे ने कहा – मैं घर जा रहा हूँ| समय हो गया है, अगर में समय पर घर न लौटा तो कुम्हार डंडे से मार – मार कर मेरा कचुम्बर निकाल देगा| तब खरगोश बकरी की तरफ चला|

बकरी ने कहा “छोटे भाई इधर मत आना, मुझे शिकारी कुत्तो से बहुत डर लगता है| कहीं तुम्हारे साथ मैं भी न मारी जाऊ| इतने में कुत्ते पास आ गए| खरगोश सिर पर पैर पाँव रखकर भागा| कुत्ते इतनी तेज दोड न सके| खरगोश झाड़ी में जा कर छिप गया| वह मन में कहने लगा – हंमेशा अपने पर ही भरोसा करना चाहियें|

सिख : दोस्ती की परख मुसीबत में ही होती है|